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में अज्ञानी कवि के कंटेंट पर पूर्ण स्वामित्व मेरा है कॉपी करना वर्जित है लेकिन नाम के साथ प्रकाशित करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

Saturday, 23 November 2013

समाज के गद्दार

दोहरा चरित्र लिए घूम रहे इन समाज के गद्दारो को तो पहचानो 

जो खुद से ही खुद को नीलाम कर रहे 

समाज हितेषी के नाम पर रजपूत को गुमराह कर रहे 

क्या मर गया ज़मीर इनका जो खुद को कर रहे है किसी के अधीन 

कुछ तो शर्म करो रजपूती मर्यादा कि 

कुछ तो लिहाज रखो क्षत्रियत्व का 

कुंवर गजेन्द्र करता है विनती आपसे 

बंद करो मोल भाव मेरे समाज का

कुछ तो बात करो रजपूत कि 

उसके हक़ कि उसके ईमान कि 

रजपूती धर्म कि रजपूती पहचान कि। 


लेखन :- कुंवर गजेन्द्र

Friday, 22 November 2013

दर्द झलकता है

" कभी  जन्नत  सी  लगती  थी  वो  गलियां  

जहाँ  पनाह  थी  तेरी आज  उनका  ख्याल  भी  

आये  तो  रूह तक  कांप  जाती  है। "  

कुंवर गजेन्द्र 



राजपूतों वाले कर्म

राजपूत हो तो राजपूत होने का ढिंढोरा मत पिटो 
राजपूतों वाले कर्म भी करो जिससे दुनिया हम पर गर्व करे 
आज तक हम अपने पूर्वजो के इतिहास पर ही गर्व करते रहे है हमको 

भी तो कुछ 

करना है जिससे की आगे की पीढ़ी राजपूत होने पर गर्व 

करे................लेखन  :- कुंवर गजेन्द्र