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में अज्ञानी कवि के कंटेंट पर पूर्ण स्वामित्व मेरा है कॉपी करना वर्जित है लेकिन नाम के साथ प्रकाशित करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

Friday, 22 November 2013

दर्द झलकता है

" कभी  जन्नत  सी  लगती  थी  वो  गलियां  

जहाँ  पनाह  थी  तेरी आज  उनका  ख्याल  भी  

आये  तो  रूह तक  कांप  जाती  है। "  

कुंवर गजेन्द्र 



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