कही नहीं दीखता मुझे महाराणा आपके भाले सा तेज यहाँ , कही नहीं दिखती मुझे आपकी वो प्रतिज्ञा आज यहाँ , कही नहीं सुनाई देती आपके चेतक की टाप यहाँ, कही नजर ना आते मुझको भामाशाह आज यहाँ , सुनी पड़ी वो हल्दी घाटी करे पुकार , लौट आओ महाराणा , मेरा राजपुताना खतरे में आज यहाँ। कुंवर गजेन्द्र
बहुत खूब।
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