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Saturday, 8 February 2014


कही नहीं दीखता मुझे महाराणा आपके भाले सा तेज यहाँ , 
कही नहीं दिखती मुझे आपकी वो प्रतिज्ञा आज यहाँ ,
कही नहीं सुनाई देती आपके चेतक की टाप यहाँ, 
कही नजर ना आते मुझको भामाशाह आज यहाँ  ,
सुनी पड़ी वो हल्दी घाटी करे पुकार ,
लौट आओ महाराणा ,
मेरा राजपुताना खतरे में आज यहाँ।  

कुंवर गजेन्द्र

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