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में अज्ञानी कवि के कंटेंट पर पूर्ण स्वामित्व मेरा है कॉपी करना वर्जित है लेकिन नाम के साथ प्रकाशित करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

Tuesday, 29 October 2013



















क्या लिखू कलम से में राजपूतों का होता दमन लिखू 
या उस बर्बाद होती संस्क्रति का हस्र लिखू 
या उस बेरोजगार राजपूत युवा का संघर्ष लिखू 

कुछ समझ नहीं आता क्या लिखूं 

उस अबला विधवा के आंसुओ की धार लिखूं 
या मेरे समाज के नेताओं का विचार लिखूं 
दारू में बर्बाद होते मेरे समाज का विलाप लिखू 

अब भी समय है संभल जाओ वर्ना दुनिया हमारा अतीत लिखेगी।

कुंवर गजेन्द्र

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