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में अज्ञानी कवि के कंटेंट पर पूर्ण स्वामित्व मेरा है कॉपी करना वर्जित है लेकिन नाम के साथ प्रकाशित करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

Tuesday, 29 October 2013


भैया चुनावी सीजन है 

कोई वोट मांग रहा दादा , दादी और पिता कि झूठी शहादत पर 

कोई वोट मांग रहा जात पात पर 
कोई वोट  मांग रहा कागजी  विकास पर 
कोई वोट मांग रहा धर्म कि ओठ पर 
कोई वोट मांग रहा खंजर कि नौक पर 
गली गली ये द्वारे द्वारे 
घूम फिर ये कर रहे फिर वही  झूटे वादे न्यारे न्यारे 
कोई दादी के पैर पकड़ मांगे तो कोई पापा से हाथ जोड़कर मांगे 
मुझको भी लेपटॉप का देते ये आश्वासन
दीदी  को भी कह कर गए  दूंगा गुड़िया तुझको भी साइकल 
कोई खादी में तो कोई अंग्रेजी सूट बूट में 
साथ में है चमचो कि फौज 
जीत गए तो पांच साल तक  इनकी भी होगी मौज 

लेखन  :- कुंवर गजेन्द्र 


नोट (छायाचित्र को केवल प्रतिकात्मक तौर पर दर्शाया गया है लेखक का उद्देश्य किसी के पक्ष विपक्ष में प्रचार करना नहीं है)  

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