में राजपूत हूँ
भगवान राम का वंशज
जब जब धरती पर पाप बढ़ा
मेने अवतार लिया
कभी कृष्ण बनके यदुवंश में खेला
तो कभी धर्म कि रक्षा के लिए महाभारत में अपनों से लड़ा ,
में राजपूत हूँ
कभी महाराणा बन के संघर्ष किया
तो कभी चौहान बनके
किया सबका सर्वनाश
ना में झुका ना में टुटा
ना ही में रुका,
में राजपूत हूँ
कभी मुगलों से किया संघर्ष
तो कभी अंग्रेजो से लोहा लिया
कोई ना डिगा पाया मुझको ,
सर्वश्र यही बना हूँ ,
में राजपूत हूँ
आन बान और वचन का पक्का
में अपनी जबान का सच्चा
में कभी अन्याय ना सहन करता
न्याय के लिए हमेशा कटिबद्ध रहता ,
में राजपूत हूँ
आज़ादी के लिए दिया बलिदान
देश के लिए आज भी देता हूँ सीमा पर जान
इसका मुझे नहीं है अभिमान,
में राजपूत हूँ
कभी अपनों को तोड़ने में लगा था
आज अपनों को जोड़ने में लगा हूँ
अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा हूँ
बस ऐसे ही घुट घुट के जी रहा हूँ ,
में राजपूत हूँ
कभी मेरी बहादुरी के किस्से आम थे
आज मेरी गुमनामी के चर्चे आम है
इसी घमंड में जी रहा हूँ कि में राजपूत हूँ
में राजपूत हूँ
संघर्ष करता युवा हूँ
किसी सैनिक कि विधवा का में वो आंसू हूँ
दारु से जंग लड़ता ,
देहज से बर्बाद होता
कुछ नहीं सूझता क्या में राजपूत हूँ ,
सच में , में राजपूत हूँ मेरी यही कहानी है।
लेखन :- कुंवर गजेन्द्र
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